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मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से 4 वायरस इस बीमारी के कारक माने जाते हैं – à¤, बी, सी और ई- और काफी हद तक रोके जा सकते हैं। 4 वायरस में से, हेपेटाइटिस ठऔर ई कम गंà¤à¥€à¤° और आमतौर पर अलà¥à¤ªà¤•ालिक संकà¥à¤°à¤®à¤£ होते हैं (जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ ठीक हो जाता है)। यह दूषित à¤à¥‹à¤œà¤¨/पानी खाने या पीने के कारण होता है।
हेपेटाइटिस बी और सी वायरस के अधिक गंà¤à¥€à¤° पà¥à¤°à¤•ार हैं और दीरà¥à¤˜à¤•ालिक (पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€) संकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण बनते हैं। हेपेटाइटिस बी या सी वायरस के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से यकृत को गंà¤à¥€à¤° कà¥à¤·à¤¤à¤¿ हो सकती है जो लिवर सिरोसिस (पूरà¥à¤£ सà¥à¤•ारिंग) से यकृत की विफलता और यहां तक कि कà¥à¤› मामलों में यकृत का कैंसर तक हो सकती है। वे उपचार जो केवल अंतिम चरणों में संà¤à¤µ है, यकृत पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‹à¤ªà¤£ है जो महंगा है, और सफलता दर लगà¤à¤— 85 से 95% है। अधिकांश लोगों को यह पता नहीं होता है कि वे हेपेटाइटिस बी या सी से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हैं; आमतौर पर वे वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ बाद जान पाते हैं, पर तब तक यकृत को गंà¤à¥€à¤° कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤à¤š जाती है और यकृत की विफलता की जटिलताà¤à¤‚ पैदा हो चà¥à¤•ी होती है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ वे इसे नियमित रूप से चिकितà¥à¤¸à¤¾ परीकà¥à¤·à¤¾ के दौरान जानते हैं। सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से, हेपेटाइटिस सी पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में पता चलने पर अब नठजमाने की दवाओं (3 से 6 महीने में) के साथ इलाज योगà¥à¤¯ है। हालांकि हेपेटाइटिस बी वायरस का संकà¥à¤°à¤®à¤£ पूरी तरह से ठीक नहीं होता है, लेकिन दवाओं के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से इसका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ ढंग से इलाज किया जा सकता है ताकि अधिकांश रोगी अपने जीवनकाल के दौरान सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहें। हेपेटाइटिस बी के लिठटीकाकरण अब सà¤à¥€ शिशà¥à¤“ं, और जोखिम वाले वयसà¥à¤•ों को बीमारी से बचाने के लिठकिया जाता है।
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ के 6 महीने में हेपेटाइटिस बी इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को 'à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट' माना जाता है. सही इलाज से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° लोग इन छह महीनों में ठीक हो जाते हैं. अगर हेपेटाइटिस बी वायरस टेसà¥à¤Ÿ 6 महीने के बाद à¤à¥€ पॉजिटिव आता है तो ये कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• (लंबे समय तक रहने वाला) में बदल जाता है.
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